असली अर्थ शास्त्री कोन :
अर्थ शास्त्र के नाम से जाए तो अर्थ + शास्त्र मतलब " धन की पोथी" को हम अर्थ शास्त्र कहते हे पर असल में जो अर्थ शास्त्र हमको स्कुल कालेजो में पडाया गया वो असली जिन्दगी में कभी भी काम में नहीं आया | काला धन का मुद्दा लेकर एक बाबाजी ने पुरे देश को सर पर उठा लिया था और ऐसा लग रहा था की बाबा राम देव ने ही अर्थ शास्त्र में पि एच् डी कर ली हे और सारे अर्थ शास्त्री बेकार हो गए हे | वो जो फेक फेक कर देते थे तो जनता को अच्छा लगता था पर वो अचानक काले धन पर चुप हो गए पता नहीं उनकी पतंजलि के बोरे शायद सिस्टम में आ गए होन्गे तो उन्होंने चुप्पी साध ली | वो दिन इतनी बार काला धन बोलते थे की देहात के लोग भी "काला धन' नाम की बात करने लगे थे जेसे कोई लाटरी वगेरह होगी काला धन के जिसके खुलते हे सब के खातो में १५-१५ लाख आ जावेंगे| जब चुनाव हुवे तो शेर की दहाड़ सुन कर ऐसा लगा की ये हे शेर स्विस बेंक में घुस कर काला धन लाने में पूरी तरह से मुस्तेद हे अब तो १५ लाख खाते में आ ही जावेगे | अब तो विदेशो से खूब बोरे भर भर के मोदी जी काला धन ले आयेंगे | भिया की पढाई की मार्कशीट पर भी आर टी आई लग रही हे और जिनका अर्थ शाश्त्र से कोई सम्बन्ध नहीं हे उन्होंने पूरी सरकार को अँधेरे में रखकर खुद ही सारा अर्थ शास्त्र रच दिया | सारे ठगे ठगे से रह गए की यार ये तो बड़ा अर्थ शास्त्री निकला |ये तो वेसे ही हुवा की अर्जुन को चिड़िया की आख दिख रही हे और सब उस तरफ मुह करके देखते रहे और भइये ने तीर घुमा के निहत्थे पुतले में ठोक दिया और बड़े तीरंदाज बन गए | जनता को स्विस बेंक याद ना आये इसलिए उनको ही इतना डरा दो की वो काले धन की बात ही न करे |कुछ भी कहो पर असली अर्थ शास्त्री न तो बाबा जी थे , ना पिछले नेताजी थे , ना नए नेताजी हे और न ही रिजर्व बेक वाले न वर्ल्ड बेक वाले बल्कि असली अर्थ शास्त्री तो ओज कवि डा. हरिओम पवार हे जिन्होंने वर्षो पहले इस नोट बंदी की पूरी शब्दसह प्लानिंग एक कविता के रूप में कर दी थी कहते हे जहा न पहुचे रवि वहा पहुचे कवि | पूरा इतिहास गवाह हे की प्रथ्वीराज चोहान से लगाकर हरिओम पवार तक राजशाही में कवि का महत्व कम नहीं आका जा सकता |अब स्विस बेंक वाले काले धन की कविता पवार साब कब लिखते हे इसका इन्तजार हे |
राजेश भंडारी "बाबु "
९००९५०२७३४
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